9 महीने में 63% से 34% पर आया BJP का वोट, बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने रच दिया इतिहास

बांकीपुर उपचुनाव नतीजे प्रशांत किशोर जीत जन सुराज

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बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े उलटफेर के तौर पर दर्ज हुआ। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट, जो बीते तीन दशक से बीजेपी का अभेद्य किला मानी जाती थी, वहां जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में जीत हासिल कर ली।

गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ नौ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर बीजेपी के नितिन नवीन को 63 फीसदी वोट मिले थे और NDA को राज्यभर में 202 सीटों की भारी जीत मिली थी। लेकिन उपचुनाव में तस्वीर पूरी तरह पलट गई — बीजेपी उम्मीदवार सिमटकर 34.50 फीसदी वोट पर आ गए, जबकि प्रशांत किशोर 49.23 फीसदी वोट लेकर विजयी रहे।

नितिन नवीन का पारिवारिक गढ़ रहा है बांकीपुर

यह सीट नितिन नवीन के लिए सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत रही है। 1995 में उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की थी, और उसके बाद से यह सीट लगातार बीजेपी के पास रही — यहां तक कि राज्य में लालू-राबड़ी लहर के दौर में भी। नितिन नवीन के बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने और राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराना पड़ा।

टिकट बदलने की कीमत चुकानी पड़ी

बीजेपी ने शुरुआत में अभिषेक कुमार ‘बंटी’ को टिकट दिया था, लेकिन नामांकन के महज एक दिन बाद उन्हें हटाकर नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया। पार्टी के अंदर मची इस उठापटक ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा किया, बल्कि विपक्ष को भी हमला बोलने का पूरा मौका दे दिया।

पीके की रणनीति — सीधा निशाना सीएम पर

प्रशांत किशोर ने पूरे प्रचार अभियान के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को केंद्र में रखा। उनका संदेश साफ था — बांकीपुर का एक वोट सिर्फ विधायक नहीं, राज्य की सत्ता का समीकरण बदलेगा। इस बीच नीट पेपर लीक मामला और भरत तिवारी एनकाउंटर जैसे विवादों ने भी बीजेपी विरोधी माहौल बनाने में भूमिका निभाई।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार पीके ने करीब 19,324 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, वहीं आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी की जमानत जब्त हो गई — जो दिखाता है कि यह मुकाबला सीधे बीजेपी बनाम जन सुराज बन गया था।

जीत के बाद संयमित बयान

नतीजे आने के बाद प्रशांत किशोर ने बड़े दावे करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उनकी जीत से रातों-रात “बांकीपुर बैंगलोर नहीं बन जाएगा”, लेकिन क्षेत्र में सुधार की दिशा में काम जरूर होगा। साथ ही उन्होंने बीजेपी नेतृत्व से एक “साफ छवि वाले नेता” को मुख्यमंत्री बनाने की मांग दोहराई।

राजनीतिक हलकों में इस नतीजे को आने वाले समय के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि बिहार की सियासत में अब सिर्फ पारंपरिक पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं रहेगा।

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