नेबुआ नौरंगिया (कुशीनगर)। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के पिपरपाती सिवान स्थित मुगल टोली में गुड़ बनाने के कारोबार को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, करीब तीन सप्ताह पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गुड़ का नमूना लिया था, जिसे जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे जाने की बात कही गई थी। हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यहां गन्ने के रस के स्थान पर चीनी मिल के सीरे, मैदा, चीनी, रिफाइंड तेल और पापड़ी कलर जैसी सामग्री का इस्तेमाल कर गुड़ तैयार किया जा रहा है। इससे गुड़ की गुणवत्ता और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है।
रोज करीब 10 क्विंटल गुड़ तैयार होने का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक, मुगल टोली में प्रतिदिन करीब 10 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। तैयार गुड़ को कुशीनगर और महराजगंज के बाजारों के अलावा बिहार और नेपाल तक भेजे जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नमूना लिए जाने के बाद रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे कथित मिलावट का कारोबार जारी रहने की आशंका बनी हुई है।
जमीन मालिक ने व्यापारी को किराए पर दिया क्रशर
गांव के अब्बास अली ने बताया कि क्रशर उनकी जमीन पर लगा है, जिसे उन्होंने पड़रौना के एक व्यापारी को किराए पर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सहायक खाद्य आयुक्त बोले—रिपोर्ट आने में लगता है समय
सहायक खाद्य आयुक्त प्रदीप राय ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने गुड़ का नमूना लेकर लखनऊ प्रयोगशाला भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में समय लगता है। चीनी और सीरे से गुड़ बनाया जा सकता है, लेकिन गुड़ में मैदा मिलाने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।









