उत्तर प्रदेश के बांदा में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सात प्रमुख मांगें उठाईं। जिलाध्यक्ष महेन्द्र त्रिपाठी के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने, फसलों के नुकसान का मुआवजा देने और खाद की कालाबाजारी रोकने की मांग की। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
बांदा में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की। जिलाध्यक्ष महेन्द्र त्रिपाठी के नेतृत्व में किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसान नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार हैं। डीजल, खाद और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद गन्ने के मूल्य में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं, संगठन ने चीनी के खुदरा दाम में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और भुगतान समय से कराने की मांग उठाई।
ज्ञापन में गेहूं के सरकारी क्रय मूल्य में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि, असमय बारिश और तेज हवा से प्रभावित धान, उड़द व मूंग की फसलों का गांववार सर्वे कर मुआवजा देने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा, आलू किसानों को कोल्ड स्टोर के किराये में सहायता, आलू बीज की कीमत कम करने, ठेके और बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा देने तथा यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी रोककर समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
अब देखना होगा कि किसानों की इन मांगों पर शासन और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।









