25-25 के बैच में दिया जाना था प्रशिक्षण, नियम ताक पर रखकर एक ही हॉल में ठूंसा
महराजगंज। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ अब अफसरों और ठेकेदारों की लापरवाही तथा साठगांठ के कारण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। बेरोजगार महिलाओं और युवाओं को हुनरमंद बनाकर स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में प्रशिक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जा रही है। महराजगंज शहर के एक मैरिज हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर खामोशी की चादर ओढ़कर तमाशा देख रहे हैं।
कोरम पूरा कर सरकारी बजट के बंदरबांट की तैयारी
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत दर्जी, बढ़ई, टोकरी बुनकर और अन्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण देकर टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। नियमों के मुताबिक, प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर और प्रयोगात्मक जानकारी देने के लिए 25-25 के छोटे-छोटे बैच बनाकर अलग-अलग कमरों या कक्षाओं में प्रशिक्षित करने का स्पष्ट प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षक हर प्रतिभागी पर व्यक्तिगत ध्यान दे सकें।
इसके विपरीत, महराजगंज के एक मैरिज हॉल में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों महिलाओं को एक ही बड़े हॉल में भूसे की तरह बैठा दिया गया है। वहां न तो पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण की कोई समुचित व्यवस्था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हॉल में शोर-शराबे के बीच न तो प्रशिक्षक की आवाज महिलाओं तक पहुंच पा रही है और न ही महिलाएं कुछ सीख पा रही हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आयोजकों का मकसद हुनर सिखाना नहीं, बल्कि किसी तरह उपस्थिति दर्ज कराकर प्रशिक्षण का कोरम पूरा करना है, ताकि सरकारी बजट का मोटा हिस्सा आपस में बांटा जा सके।

नियम-कायदों को दिखाया ठेंगा
योजना की गाइडलाइन के अनुसार, प्रशिक्षण स्थल पर स्वच्छ पेयजल, बैठने की उचित व्यवस्था, शौचालय, और विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य है। लेकिन यहां स्थिति इसके ठीक उलट है। प्रशिक्षण लेने आई कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें केवल समय बिताने के लिए बैठाया जाता है। कोई व्यवस्थित थ्योरी या प्रैक्टिकल क्लास नहीं हो रही है। जब 25-25 के बैच का नियम ही तोड़ दिया गया, तो गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की उम्मीद करना ही बेमानी है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
प्रशिक्षण के नाम पर हो रहे इस खुले खेल से उद्योग विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला उद्योग केंद्र और योजना के नोडल अधिकारियों की नाक के नीचे यह धांधली हो रही है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अफसर मौके पर जाकर निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठा रहा है। जनचर्चा है कि इस पूरे खेल में निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के तंत्र की मौन सहमति शामिल है।
स्थानीय लोगों और लाभार्थियों ने मांग की है कि इस पूरे प्रशिक्षण सत्र की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, मैरिज हॉल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और दोषी संस्था तथा लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या भ्रष्टाचार का यह दीमक योजना को यूं ही चाटता रहेगा।









