ई-रिक्शा चालकों की मांगें नहीं मानीं तो चुनाव में प्रत्याशी उतारेगी यूनियन अयोध्या में लगभग 20 हजार वोटर है ई रिक्शा चालक व उनके परिवार

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अयोध्या। विधानसभा चुनाव को लेकर अयोध्या में राजनीतिक सरगर्मी के बीच कृष्णानंद फाउंडेशन ई-रिक्शा यूनियन ने चुनाव मैदान में उतरने का एलान किया है। यूनियन का कहना है कि यदि राजनीतिक दलों ने ई-रिक्शा चालकों की समस्याओं और मांगों को अपने चुनावी एजेंडे में जगह नहीं दी, तो वह विधानसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारेगी। प्रत्याशी यूनियन के बीच से ही किसी ई-रिक्शा चालक को बनाया जाएगा।

कृष्णानंद फाउंडेशन के संस्थापक मुकुंद माधव त्रिपाठी ने बताया कि यूनियन की बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चालक लंबे समय से रोजगार और अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दल उनकी समस्याओं को अपेक्षित महत्व नहीं दे रहे हैं। रामपथ पर लागू प्रतिबंधों के कारण चालकों को होने वाली परेशानियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यूनियन उनके रोजगार, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

मुकुंद माधव त्रिपाठी के अनुसार, यूनियन में करीब 4,011 चालक जुड़े हैं। उनके परिवारों को मिलाकर बड़ी संख्या में मतदाताओं तक संगठन की पहुंच होने का दावा किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे। यूनियन के बीच से ही प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। संभावित प्रत्याशियों में सहजाद आलम, विकास सिंह, मनोज दुबे और मोहम्मद आलम के नाम सामने आए हैं। हालांकि, अभी किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।

सद्भाव का संदेश देने को निकलेगी पदयात्रा

यूनियन ने सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देने के लिए एक नवंबर को पदयात्रा निकालने की घोषणा की है। मुकुंद माधव त्रिपाठी ने बताया कि यात्रा सरयू तट स्थित नया घाट से शुरू होगी। सरयू आरती के बाद पदयात्रा शीश पैगंबर साहब की मजार पहुंचेगी, जहां चादर चढ़ाई जाएगी।यात्रा में भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, पदयात्रा का उद्देश्य किसी सरकार या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, राष्ट्रीय अखंडता और आपसी भाईचारे को मजबूत करना है।

मांगों पर रुख स्पष्ट करने की अपील

यूनियन के चुनाव लड़ने के एलान से अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि, संगठन के चुनावी प्रभाव का आकलन उसके समर्थन और मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी से ही हो सकेगा। फिलहाल यूनियन ने राजनीतिक दलों से ई-रिक्शा चालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की है।

अब देखना होगा कि राजनीतिक दल इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और यूनियन प्रत्याशी उतारने की घोषणा को किस तरह आगे बढ़ाती है।

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