आशा कार्यकत्रियों ने 21 हजार रुपये मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की उठाई मांग

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महराजगंज। उत्तर प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों एवं आशा संगिनियों ने अपने मानदेय में वृद्धि करने तथा राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को मांग पत्र भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई है।

मांग पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में आशा कार्यकत्रियों और आशा संगिनियों की नियुक्ति को लगभग 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाली धनराशि महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। आशा कार्यकत्रियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

आशा कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, जच्चा-बच्चा की देखरेख, टीकाकरण समेत स्वास्थ्य संबंधी कई कार्यों में सहयोग करती हैं। मांग पत्र में कोरोना महामारी के दौरान भी आशा कार्यकत्रियों द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्हें अपने कार्य के अनुरूप सुविधाएं और मानदेय मिलना चाहिए।

आशा कार्यकत्रियों ने प्रमुख रूप से राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और प्रोत्साहन राशि के स्थान पर 21 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय निर्धारित करने की मांग की है। इसके अलावा दुर्घटना बीमा की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने और बीमा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।

मांग पत्र में आशा कार्यकत्री एवं आशा संगिनी की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को नौकरी देने, उनके द्वारा बनाए गए आभा कार्ड एवं सी-बैंक से संबंधित धनराशि का भुगतान करने तथा 5जी मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।

आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

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