आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी अहम जिम्मेदारी रहती है। इसके बावजूद उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल रहा है।
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने निश्चित मानदेय, समान अधिकार और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई है। संगठन की ओर से बताया गया कि 8 अक्टूबर 2026 से प्रसव कार्य को छोड़कर अन्य कार्यों के बहिष्कार तथा धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है।
आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा संगिनियों ने सरकार से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और मांगों का समाधान करने की अपील की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कर्मियों को उचित मानदेय और सम्मान मिलना चाहिए।
अब देखना होगा कि सरकार आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर क्या कदम उठाती है और कार्य बहिष्कार के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
- निश्चित मानदेय दिया जाए।
- समान वेतन एवं अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
- राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।









