बिजनौर में लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज

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दाखिल-खारिज की रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

खबर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से है, जहां चांदपुर क्षेत्र से जुड़े दो लोगों ने एक लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीन के बैनामे पर हस्तांतरण रिपोर्ट लगाने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर उनसे रिश्वत की मांग की गई।

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित लेखपाल पर पहले भी कथित रिश्वत लेनदेन से जुड़ा वीडियो वायरल होने का दावा किया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित लेखपाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और उनके तथा उनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज संपत्तियों की जांच कराने की मांग उठाई है।

हालांकि, रिश्वत मांगने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित लेखपाल का पक्ष भी सामने नहीं आया है।

पूरा मामला बिजनौर जनपद की धामपुर तहसील के अंतर्गत मौजा कासमपुर लेखराज का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता इकबाल अहमद और मोहम्मद शादाब के मुताबिक, उन्होंने खसरा नंबर 54 में बैनामे के जरिए 425 वर्ग गज जमीन खरीदी है। अब वे अपनी खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज कराना चाहते हैं।

शिकायत के अनुसार, हस्तांतरण रिपोर्ट लगवाने के लिए जब उन्होंने संबंधित हल्का लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि से संपर्क किया, तो आरोप है कि रिपोर्ट लगाने के बदले रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पैसे देने से इनकार करने पर लेखपाल ने रिपोर्ट लगाने से मना कर दिया।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ महीने पहले दाखिल-खारिज के नाम पर कथित पैसों के लेनदेन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। शिकायतकर्ताओं ने इस वीडियो की जांच कराकर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

इसके अलावा, शिकायतकर्ताओं ने संबंधित लेखपाल और उनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।

इस संबंध में जब संबंधित लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में अब निगाहें संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।

फिलहाल, रिश्वत मांगने और संपत्ति से जुड़े सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। मामले की सच्चाई जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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