भारत दौरे पर रुबियो के सामने मुद्दे उठाने की मांग, अमेरिकी सांसदों ने लिखा पत्र

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भारत आने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को सांसदों ने पत्र लिखा है| उन्होंने भारत में प्रदर्शनों और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल उठाने की मांग की|

भारत यात्रा के दौरान मुद्दे उठाने की मांग

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले वहां के कुछ सांसदों ने उनसे भारतीय अधिकारियों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की है| रुबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे| शुक्रवार को भेजे गए पत्र में सांसदों ने भारत में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए| उनका दावा है कि दिल्ली सहित कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल हुआ और कुछ लोगों को अनुचित तरीके से हिरासत में लिया गया| इस पत्र पर प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया के हस्ताक्षर हैं|

विरोध प्रदर्शनों और हिरासत पर जताई आपत्ति

सांसदों ने रुबियो से आग्रह किया कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के सामने मामला रखें| उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए आंदोलन का उल्लेख किया| मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी पत्र में जिक्र है| सांसदों ने इन घटनाओं के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित सख्ती पर आपत्ति जताते हुए हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की| इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने प्रदर्शनों में भाग लेने वाले लोगों की तस्वीरें लेने के लिए फोटोग्राफर तैनात किए|

मतदाता सूची में नाम हटने का मामला भी उठाया

सांसद प्रमिला जयपाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जाहिर की| उन्होंने इस प्रक्रिया को मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कार्रवाई बताया और कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन किया| इस मुद्दे पर पहले भी विवाद सामने आ चुका है| अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जयपाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया था|

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