प्रतापगढ़/लखनऊ। प्रतापगढ़ के कुंडा के बहुचर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक और जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को अदालत से राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही राजा भैया समेत पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
मामला वर्ष 2013 का है। दो मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक की भी हत्या कर दी गई थी। मामले में कई एफआईआर दर्ज हुई थीं। सीओ की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज एफआईआर में तत्कालीन कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को नामजद किया गया था।

मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने वर्ष 2013 में पहली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसका परवीन आजाद ने विरोध किया था। इसके बाद मामले की दोबारा जांच का रास्ता खुला। दोबारा विवेचना के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2023 को फिर क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों व साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
अदालत के आदेश से राजा भैया के अलावा हरिओम श्रीवास्तव, गुलशन यादव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ इस मामले में आगे की कार्यवाही समाप्त हो गई। हालांकि, यह आदेश हत्याकांड के उन अन्य आरोपियों की सजा को प्रभावित नहीं करता, जिन्हें अलग सुनवाई में दोषी ठहराया गया था। अक्टूबर 2024 में दस आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
अदालत के फैसले के बाद राजा भैया ने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” वहीं, मामले से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से पहले दोबारा जांच की मांग की गई थी।
रिपोर्ट: प्रेम मिश्रा, प्रतापगढ़









