महराजगंज। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी वर्षों से लंबित एवं न्यायोचित मांगों को लेकर शासन और राजस्व परिषद का ध्यान आकृष्ट कराया है। संघ का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार, संसाधनों की कमी, लंबित पदोन्नति, वेतन विसंगति, अतिरिक्त कार्यभार और अवकाश के दिनों में ड्यूटी जैसी समस्याओं से लेखपालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मांगों पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर प्रदेश के लेखपालों ने 17 अक्टूबर 2026 से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
संघ ने प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे तथा वेतन विसंगति दूर करने की मांग उठाई है। संघ के अनुसार इस संबंध में वर्ष 2017 में भी शासन को पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा लेखपालों ने अंतर्मंडलीय स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। संघ के मुताबिक वर्ष 2019 में करीब 650 लेखपालों का गृह मंडल में स्थानांतरण हुआ था। वर्ष 2025 में राजस्व परिषद के पोर्टल पर करीब 2669 लेखपालों ने आवेदन किया, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। संघ का दावा है कि वर्तमान में करीब 2700 लेखपाल अपने गृह जनपद अथवा गृह मंडल से 400 से 800 किलोमीटर दूर कार्यरत हैं।
संघ ने चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची तत्काल जारी करने की भी मांग की है। संगठन के अनुसार डीपीसी की कार्यवाही 29 अप्रैल 2026 को पूरी होने के बावजूद अभी तक पदोन्नति सूची जारी नहीं हुई है।
लेखपाल संघ ने पद को टेक्निकल पद घोषित करने के साथ उच्च तकनीकी संसाधन, लैपटॉप और मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। संघ का कहना है कि लेखपाल लंबे समय से ऑनलाइन और तकनीकी कार्य कर रहे हैं।
संघ ने पंचायत भवनों में बैठकर कार्य करने के दौरान उत्पन्न समस्याओं और अयोध्या में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई का भी उल्लेख करते हुए सुरक्षा और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 17 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।









