कुशीनगर। कप्तानगंज स्थित समुदायिक स्वस्थ केंद्र में स्वास्थ्य विभाग में तबादला और नवीन तैनाती को लेकर जारी आदेशों के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की ओर से आदेश जारी किए जाने और डॉक्टर की नवीन तैनाती तय होने के बावजूद संबंधित डॉक्टर के पुराने तैनाती स्थल पर ही कार्यरत रहने की स्थिति सामने आने से स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज (MOIC) की भूमिका को लेकर उठ रहा है। विभागीय व्यवस्था के तहत किसी डॉक्टर की रिलीविंग और नवीन तैनाती से संबंधित आदेश के अनुपालन में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सवाल है कि जब CMO स्तर से आदेश जारी हो चुका है, तो संबंधित डॉक्टर को अभी तक रिलीव क्यों नहीं किया गया?
कागज पर तबादला, जमीन पर स्थिति जस की तस
बताया जा रहा है कि डॉक्टर की नवीन तैनाती को लेकर CMO कार्यालय से आदेश जारी किया गया है। आदेश में नई तैनाती का स्थान भी निर्धारित है। इसके बावजूद यदि डॉक्टर पुराने स्थान पर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो यह विभागीय आदेश के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
यह स्थिति एक तरह से ऐसी तस्वीर पेश करती है जिसमें आदेश कागज पर लागू दिखाई देता है, लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आता।
MOIC से जुड़े कई सवाल
मामले में स्थानीय स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न MOIC की कार्यप्रणाली को लेकर है। आखिर CMO के आदेश के बाद डॉक्टर को रिलीव करने की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं हुई? क्या डॉक्टर को रिलीव न करने के पीछे कोई प्रशासनिक या विभागीय कारण है? यदि कोई बाधा है तो क्या इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है?
और यदि ऐसी कोई प्रशासनिक बाधा नहीं है, तो फिर CMO के आदेश का अनुपालन अब तक क्यों नहीं कराया गया?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में तैनाती और स्थानांतरण के आदेश केवल कागजी कार्रवाई नहीं होते। इनका सीधा असर अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
निगरानी किसकी, जवाबदेही किसकी?
स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की निगरानी जिलाधिकारी स्तर से होने के बावजूद यदि किसी अधिकारी के आदेश के अनुपालन में देरी होती है, तो जवाबदेही की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या CMO के आदेश के अनुपालन की निगरानी की जा रही है? अगर निगरानी हो रही है तो आदेश के बावजूद डॉक्टर की पुरानी जगह पर मौजूदगी की स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं आई?
वहीं, यदि MOIC स्तर पर किसी कारण से रिलीविंग रोकी गई है तो उस कारण को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले को लेकर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।
मरीजों के हित से जुड़ा है मामला
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की तैनाती का मामला सीधे मरीजों से जुड़ा होता है। किसी एक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर की अतिरिक्त मौजूदगी या किसी दूसरे केंद्र पर उनकी अनुपस्थिति से मरीजों को परेशानी हो सकती है।
ऐसे में सवाल केवल एक डॉक्टर के स्थानांतरण का नहीं है, बल्कि विभागीय आदेशों की प्रभावी अनुपालन व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही का भी है।
अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और CMO के आदेश का अनुपालन कब तक सुनिश्चित होता है।









