कथा व्यास ने कहा कि निस्वार्थ भाव से भगवान की भक्ति करने वाले भक्त को भगवान अपने चरणों में स्थान देते हैं। उन्होंने मीरा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूजा न कोई” को जीवन मंत्र बना लिया था।
विदुर चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण दुर्योधन के राजसी भोजन को छोड़कर भक्त विदुर के घर पहुंचे और उनके यहां साग ग्रहण किया। विदुर सदैव धृतराष्ट्र को न्याय और धर्म का मार्ग बताते थे, जिसे विदुर नीति के नाम से जाना जाता है।
समुद्र मंथन प्रसंग में उन्होंने बताया कि अमृत कलश को लेकर देवताओं और दैत्यों में विवाद होने पर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और अमृत देवताओं को पिला दिया।
उन्होंने शुकदेव जी की महिमा बताते हुए कहा कि उन्हें माया-मोह स्पर्श तक नहीं कर पाया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजन में मुरली सेठ, विक्की सेठ, सुरेंद्रनाथ तिवारी, मुसाफिर मिश्रा सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।









