बिहार के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने आरक्षण को लेकर तीखा बयान दिया है। यह बयान उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण (EWS) का समर्थन करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए दिया है।
आनंद मोहन कहते हैं कि जो लोग कहते हैं कि आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए, उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या हमारे देश के चारों पीठ के शंकराचार्य आर्थिक आधार पर बैठे हैं? क्या उनकी नियुक्ति गरीबी देखकर हुई है? नहीं, वो तो जातिगत आधार पर ही बैठे हैं। सदियों से यह पद एक ही वर्ग के पास रहा है।
उन्होंने हिन्दू राष्ट्र की बात करने वालों को भी घेरा। उन्होंने कहा कि जो लोग समस्त हिन्दू की बात करते हैं, हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, उन्हें बताना चाहिए कि क्या हिन्दू में सिर्फ एक ही जाति है? हिन्दू में पासवान भी है, रविदास भी है, पंडित भी है, ठाकुर भी है, वैश्य भी है, यादव भी है, कुर्मी भी है। अगर सब हिन्दू एक हैं तो सबको बराबर का हक क्यों नहीं मिलता?
आनंद मोहन ने आगे कहा कि अगर योग्यता की ही बात है तो शंकराचार्य के पद के लिए भी प्रतियोगिता होनी चाहिए। रामायण, गीता, उपनिषद, वेद और महाभारत का सबसे बड़ा ज्ञाता कौन है, सबसे ज्यादा चरित्रवान और विद्वान कौन है, इसका खुला कम्पटीशन करवाइए। जो जीते उसे शंकराचार्य बनाइए। फिर पता चलेगा कि ज्ञान बड़ा है या जाति।
उनका सबसे बड़ा हमला ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर था। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग चाहते हैं कि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को मिलने वाला आरक्षण खत्म हो जाए, लेकिन अपना 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण बचा रहे। ये दोहरा चरित्र है। आप अपना आरक्षण बचा कर रखना चाहते हो और दूसरे का आरक्षण खत्म करना चाहते हो, यह न्यायसंगत नहीं है।
आनंद मोहन का कहना है कि अगर आरक्षण खत्म करना है तो सबका खत्म करो। सिर्फ दलितों और पिछड़ों का ही क्यों? अगर आरक्षण खत्म होगा तो ईडब्ल्यूएस भी खत्म होना चाहिए, शंकराचार्य का जातिगत आरक्षण भी खत्म होना चाहिए।
उनके इस बयान के बाद बिहार और झारखंड की राजनीति में बहस तेज हो गई है। दलित-पिछड़े वर्ग के नेता उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि सवर्ण वर्ग के कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं।
लोकेशन… पटना
रिपोर्ट रमण कुमार









