सर्पदंश के मामले बढ़े, 663 मरीज अस्पताल पहुंचे, 1300 एएसवी इंजेक्शन लग

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कुशीनगर। बारिश के मौसम में जिले में सर्पदंश के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में बीते 21 जुलाई से 20 अगस्त तक सर्पदंश के 663 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इन मरीजों के उपचार में करीब 1300 एएसवी (एंटी स्नेक वेनम) इंजेक्शन लगाए गए। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से सभी मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे।

चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की घटना होने पर घबराएं नहीं और झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में समय बर्बाद न करें। मरीज को शांत रखते हुए जितनी जल्दी हो सके नजदीकी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज पहुंचाएं।

विशेषज्ञों के मुताबिक सर्पदंश के बाद शुरुआती आधे घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से काटने या कसकर बांधने से बचना चाहिए। खासकर उंगली या पैर में सांप के काटने पर जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

सर्पदंश के बाद दिख सकते हैं ये लक्षण

चिकित्सकों के अनुसार सर्पदंश के बाद आंखों से धुंधला दिखाई देना, उल्टी, पेट दर्द, काटे गए स्थान पर असहनीय दर्द और काला धब्बा पड़ना जायदा नींद आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आवाज में बदलाव और मुंह से लार निकलना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

डॉ सुशील कुमार के अनुसार, सर्पदंश के बाद कई लोग भयभीत हो जाते हैं। इससे घबराहट, बेचैनी, चक्कर और झनझनाहट महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सदमे के कारण स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए।

झाड़-फूंक के चक्कर में न गंवाएं समय

चिकित्सकों ने बताया कि कई बार परिजन झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है। सर्पदंश के मामले में समय पर एएसवी उपलब्ध कराकर उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सर्पदंश के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें खड्डा , लक्ष्मीपुर, नेबुआ, पडरौना, सहित जनपद के कई लोगों की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

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