निशुल्क गुरुकुल की जमीन पर कब्जे का आरोप, विद्यार्थियों के हित में भूमि खाली कराने की मांग

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अस्थायी पार्किंग के लिए दी गई थी जमीन, अब नगर निगम एवं ट्रैफिक पुलिस की गाड़ियां खड़ी किए जाने का आरोप 1925 में हुई थी गुरुकुल की स्थापना, करीब 200 विद्यार्थी रहकर प्राप्त कर रहे शिक्षा

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय की भूमि के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। गुरुकुल के पूर्व छात्र बाबा अभिषेक दास ने भूमि पर पार्किंग के नाम पर स्थायी कब्जे का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर जमीन खाली कराने की मांग की है। वहीं,

गुरुकुल से जुड़े अरुण मित्र शास्त्री ने संस्थान की स्थापना, वैदिक शिक्षा और वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों के लिए भूमि के महत्व को रेखांकित किया बाबा अभिषेक दास के मुताबिक, वर्ष 2006 में वह इस गुरुकुल के विद्यार्थी रहे हैं और संस्थान से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने बताया कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अयोध्या में पार्किंग व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन के आग्रह पर गुरुकुल की भूमि उपलब्ध कराई गई थी।

आरोप है कि अस्थायी व्यवस्था के लिए दी गई जमीन का अब लगातार पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 बिस्वा भूमि पर बाउंड्री कराकर पार्किंग की व्यवस्था कर दी गई है उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर पहले विद्यार्थी खेलकूद करते थे और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेते थे, वहां अब गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं। इससे बच्चों के खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध स्थान प्रभावित हो रहा है।

बाबा अभिषेक दास ने छात्रावास के सामने की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि परिसर के आसपास साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं है और झाड़ियों के कारण सांप तथा कीड़े-मकोड़े आने का खतरा बना रहता है बाबा अभिषेक दास ने यह भी आरोप लगाया कि चालान किए जाने के बाद नगर निगम की गाड़ियां गुरुकुल परिसर में लाकर खड़ी की जाती हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुकुल की भूमि का उपयोग विद्यार्थियों की शिक्षा, खेलकूद और सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि मामले का संज्ञान लेकर जमीन को खाली कराया जाए तथा विद्यार्थियों के लिए खेलकूद की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं वहीं, अरुण मित्र शास्त्री ने गुरुकुल के ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान की स्थापना वर्ष 1925 में गोरखपुर निवासी स्वामी त्यागानंद सरस्वती ने की थी।

उनके अनुसार, गुरुकुल में बच्चों को चारों वेदों की शिक्षा दी जाती है और यहां करीब 200 विद्यार्थी रहकर अध्ययन करते हैं। गुरुकुल का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा प्रदान करने के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है गुरुकुल से जुड़े लोगों का मानना है कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ खेलकूद और शारीरिक विकास के लिए भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।

ऐसे में भूमि के उपयोग को लेकर उठे सवालों के बीच प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि जमीन अस्थायी पार्किंग के लिए दी गई थी, तो उसकी शर्तों और वर्तमान उपयोग की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है फिलहाल, भूमि के स्वामित्व, पार्किंग के लिए जमीन उपलब्ध कराने की शर्तों और कथित कब्जे को लेकर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर गुरुकुल की भूमि और विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

रिपोर्ट अंकुर पांडेय

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