महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा कस्बे के प्रसिद्ध मां बनैलिया समय माता मंदिर में शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही माता के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा। भारत के साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी है मान्यता
मां बनैलिया मंदिर को श्रद्धालु गहरी आस्था का केंद्र मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र के घने जंगल में आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना की थी। मान्यता है कि माता ने उन्हें पिंडी स्वरूप में दर्शन देकर विजय का आशीर्वाद दिया था। जंगल में विराजमान होने के कारण माता को वनदेवी के रूप में भी जाना जाता है।
1888 में हुआ मंदिर का निर्माण
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, केदार मिश्रा नामक ब्राह्मण किसान को स्वप्न में माता ने दर्शन देकर प्राचीन पिंडी के बारे में बताया था। इसके बाद वर्ष 1888 में स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां छोटे मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर की विधिवत पुनर्स्थापना 20 जनवरी 1991 को हुई। हर साल इस दिन वार्षिकोत्सव मनाया जाता है।
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं हाथी
मंदिर में मन्नत पूरी होने पर मिट्टी या धातु के हाथी चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर समिति गरीब बच्चों को शिक्षा, भोजन और रहने की सुविधा भी उपलब्ध कराती है। इस अवसर पर मंदिर समिति के संरक्षक कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, अध्यक्ष संतोष जायसवाल, रामेश्वर अग्रवाल, आशीष साहू, ज्वाला शुक्ला, बाबा जितेंद्र पांडेय, बाबा रामलाल, चंद्रशेखर, विनोद बाबा और गोपाल अग्रहरि सहित अन्य लोग मौजूद रहे।









