लूना हॉस्पिटल में नरगिस की मौत पर FIR का आदेश, CCTV और CDR से होगी जांच

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कुशीनगर। कसया स्थित लूना हॉस्पिटल में उपचार के दौरान नरगिस की मौत के मामले में करीब चार महीने बाद न्यायिक कार्रवाई का रास्ता खुल गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुशीनगर ने कसया पुलिस को प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने का आदेश दिया है।

न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस को मामले में केवल शिकायत और बयानों के आधार पर ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर भी जांच करनी होगी। न्यायालय के आदेश में अस्पताल तथा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर उनकी जांच करने के साथ ही संबंधित डॉक्टरों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन की पड़ताल को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के चिकित्सकीय रिकॉर्ड तथा आयुष्मान योजना से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लेने की बात सामने आई है।

ऑपरेशन के दौरान बिगड़ी थी नरगिस की हालत

शिकायत के अनुसार नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड संख्या चार निवासी नरगिस पत्नी तसलीम गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। परिजनों ने बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें कसया स्थित लूना हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। आरोप है कि ऑपरेशन की प्रक्रिया के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई।

नरगिस की मौत के बाद परिजनों की ओर से उपचार और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आयुष्मान कार्ड की प्रक्रिया के नाम पर मरीज और उसके परिजनों से धनराशि लिए जाने सहित अन्य अनियमितताएं हुईं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

सीसीटीवी से सामने आ सकती है अहम जानकारी

न्यायालय के आदेश में एक जून 2026 से दो जून 2026 तक की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराने और उसकी जांच करने की दिशा महत्वपूर्ण है। जांच के दौरान यह देखा जा सकेगा कि नरगिस के अस्पताल पहुंचने से लेकर घटना के बाद तक अस्पताल में कौन-कौन लोग मौजूद थे और ऑपरेशन थियेटर के आसपास किन लोगों की आवाजाही हुई।
इसके साथ ही संबंधित सर्जन और एनेस्थीसिया चिकित्सक के मोबाइल नंबरों की सीडीआर तथा लोकेशन की जांच भी की जाएगी। इससे अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज चिकित्सकों की मौजूदगी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मिलान किया जा सकेगा।

एनेस्थीसिया और सर्जरी को लेकर उठे सवाल

मामले में अब विवेचना के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना होगा कि नरगिस के ऑपरेशन के समय कौन-कौन से चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। एनेस्थीसिया किस चिकित्सक ने दिया, सर्जिकल प्रक्रिया में कौन शामिल था और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं, जैसे बिंदुओं पर भी पुलिस को साक्ष्य जुटाने होंगे।

पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड, ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज, दवाओं और उपचार संबंधी विवरण सहित अन्य उपलब्ध अभिलेखों की भी जांच कर सकती है। आवश्यकता के अनुसार संबंधित चिकित्सकों और अस्पताल कर्मियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज भी जांच में

शिकायतकर्ता की ओर से न्यायालय के समक्ष नरगिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की छायाप्रति, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित पत्राचार, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से जुड़े दस्तावेज, आयुष्मान योजना से संबंधित संदेश तथा पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत की रजिस्ट्री रसीद सहित कई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।

अब इन दस्तावेजों की जांच विवेचना के दौरान की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय अभिलेखों का परीक्षण मामले में मौत के कारण और उपचार की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

एफआईआर के बाद जांच की दिशा होगी महत्वपूर्ण

न्यायालय के आदेश के बाद अब कसया पुलिस के सामने प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने की जिम्मेदारी है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर, लोकेशन, अस्पताल के दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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