कुशीनगर। सरकार की ओर से दिव्यांगजनों को आवागमन में सहूलियत देने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली ट्राई साइकिलों की खड्डा विकास खंड परिसर में दुर्दशा का मामला सामने आया है। विकास खंड परिसर के पीछे, वन विभाग के पास और सचिवों के आवास के पीछे कबाड़ के बीच कई ट्राई साइकिलें पड़ी मिली हैं। स्थानीय स्तर पर इनकी संख्या करीब पांच से आठ बताई जा रही है।
मौके की तस्वीरें और जानकारी सामने आने के बाद सरकारी संसाधनों के रखरखाव और जरूरतमंद दिव्यांगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ खड्डा विकास खंड क्षेत्र में कई दिव्यांग ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें अब तक ट्राई साइकिल नहीं मिल सकी है। वहीं दूसरी तरफ विकास खंड परिसर में ट्राई साइकिलें उपयोग में आने के बजाय कबाड़ के बीच पड़ी दिखाई दे रही हैं।
बताया जा रहा है कि विकास खंड परिसर के पीछे वन विभाग के पास तथा सचिवों के आवास के पीछे खाली स्थान में इन ट्राई साइकिलों को रखा गया है। लंबे समय से खुले में पड़े रहने के कारण इनके खराब होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि ये ट्राई साइकिलें सरकारी योजना के तहत जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध कराई गई थीं, तो उनका इस तरह खुले में पड़े रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिव्यांगजनों के लिए ट्राई साइकिल महज एक सरकारी सामान नहीं, बल्कि उनके दैनिक आवागमन और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में यदि क्षेत्र में पात्र दिव्यांगजन सुविधा से वंचित हैं और दूसरी ओर ट्राई साइकिलें ब्लॉक परिसर में कबाड़ के बीच पड़ी हैं, तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये ट्राई साइकिलें किस योजना के तहत विकास खंड में आईं, इन्हें किन लाभार्थियों को वितरित किया जाना था और अब तक इनका वितरण क्यों नहीं हुआ। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि लंबे समय से पड़ी ट्राई साइकिलों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मौके पर पड़ी ट्राई साइकिलों का सत्यापन कराया जाए और यदि वे उपयोग योग्य हैं तो पात्र दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें वितरित किया जाए। साथ ही सरकारी सामग्री को कबाड़ में पड़े रहने की स्थिति के लिए जिम्मेदारी भी तय की जाए।
अब देखना होगा कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद विकास खंड और संबंधित विभाग के अधिकारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं और कब तक इन ट्राई साइकिलों को जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचाया जाता है।









