लाखों खर्च कर बनाए मिनी स्टेडियम बदहाल, कहीं अधूरा निर्माण तो कहीं मैदान बना चारागाह

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नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के विजयपुर, सिरसिया बुजुर्ग, मड़ार विंदवलिया और कुर्मी पट्टी गांव का मामला

कुशीनगर । ग्रामीण युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से गांवों में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए मिनी स्टेडियम अब बदहाली का शिकार हैं। कहीं निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है तो कहीं खेल उपकरण टूटकर जमीन पर पड़े हैं। कई मैदानों में झाड़ियां उग आई हैं और उनका इस्तेमाल खेल के बजाय चारागाह के रूप में होने लगा है।

विजयपुर में करीब 18 लाख खर्च, फिर भी अधूरा काम

विजयपुर गांव में वर्ष 2023-24 में क्षेत्र पंचायत की ओर से करीब 18 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण शुरू कराया गया था। करीब तीन साल बीतने के बाद भी इसका काम पूरा नहीं हो सका है। चारदीवारी तो बना दी गई, लेकिन उस पर प्लास्टर तक नहीं कराया गया। मैदान में बनी रैंप और परिसर में लगाए गए खेल उपकरण भी टूटने लगे हैं।

सिरसिया बुजुर्ग में दोबारा बनानी पड़ी चारदीवारी

सिरसिया बुजुर्ग में भी वर्ष 2023-24 में लगभग 18 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम बनाया गया था। निर्माण के कुछ समय बाद ही इसकी चारदीवारी टूट गई। बाद में दोबारा चारदीवारी बनवाई गई, लेकिन पहली बार निर्माण में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। यहां स्ट्रीट लाइटें खराब हैं और खेल उपकरण टूटकर जमीन पर पड़े हैं। स्टेडियम के पास बना हैंडपंप भी कई वर्षों से खराब बताया जा रहा है।

मड़ार विंदवलिया में मैदान बना चारागाह

मड़ार विंदवलिया गांव में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए मिनी स्टेडियम की स्थिति भी खराब है। मैदान से खेल उपकरण गायब हैं और परिसर में सुविधाओं के नाम पर केवल एक रैंप दिखाई देता है। देखरेख के अभाव में मैदान का इस्तेमाल अब चारागाह के रूप में होने लगा है।

कुर्मी पट्टी में झाड़ियों से घिरा मैदान

कुर्मी पट्टी गांव में करीब 15 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम बनाया गया था। वर्तमान में पूरे मैदान में झाड़ियां उग आई हैं। ओपन जिम के उपकरण और अन्य खेल सामग्री भी खराब हालत में हैं। मैदान की स्थिति देखकर स्टेडियम कम और चारागाह अधिक नजर आता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चे यहां खेलने से भी डरते हैं।

शाम होते ही जुटने लगते हैं अराजकतत्व

स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही इन स्टेडियमों में अराजकतत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और खेल उपकरणों की देखरेख की जाए तो इन मैदानों का उपयोग ग्रामीण युवाओं की खेल प्रतिभा निखारने के लिए किया जा सकता है।

बीडीओ बोले—सभी स्टेडियमों का होगा निरीक्षण

इस संबंध में बीडीओ मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि मामला गंभीर है। सभी मिनी स्टेडियमों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा और जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें दूर कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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