बांदा में देवी प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर प्रशासन अलर्ट।
केन नदी किनारे कृत्रिम तालाब का निर्माण जारी।
20 अक्टूबर को करीब 400 देवी प्रतिमाओं का होगा विसर्जन।
विसर्जन मार्ग के गड्ढे भरने और प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश।
तेज आवाज और फूहड़ संगीत वाले डीजे पर रहेगी प्रशासन की नजर।
उत्तर प्रदेश के बांदा में शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ ही देवी प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारियां तेज हो गई हैं। 20 अक्टूबर को होने वाले विसर्जन को लेकर नगर पालिका और जिला प्रशासन अलर्ट है। विसर्जन मार्ग के गड्ढों को भरने के साथ ही केन नदी के किनारे कृत्रिम तालाब तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदी के जल को प्रदूषण से बचाना और जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं, प्रशासन ने सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और डीजे की आवाज पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
देवी प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी और केंद्रीय पूजा समिति के पदाधिकारी केन नदी किनारे स्थित विसर्जन स्थल पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान पोकलैंड मशीन से खोदे जा रहे कृत्रिम तालाब की गहराई का जायजा लिया गया। साथ ही विसर्जन मार्ग को दुरुस्त करने और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जानकारी के मुताबिक, बांदा शहर में इस बार करीब 400 देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिनका विसर्जन 20 अक्टूबर को प्रस्तावित है। प्रशासन का प्रयास है कि विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए केन नदी के मुख्य जल प्रवाह में प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कृत्रिम तालाब बनाया जा रहा है। वहीं, विसर्जन जुलूसों में तेज आवाज में डीजे बजाने और फूहड़ संगीत पर भी निगरानी रखी जाएगी। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।









