सोन नदी में छोड़े गए 50 हजार मछलियों के बच्चे, आकार को लेकर उठे सवाल

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मत्स्य संरक्षण के लिए चोपन घाट पर रिवर रैचिंग कार्यक्रम आयोजित, छोटी मछलियों के जीवित रहने पर जताई आशंका

सोनभद्र। जिले के चोपन स्थित सोन नदी घाट पर मत्स्य संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से रिवर रैचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य सेक्टर योजना के अंतर्गत मत्स्य विभाग द्वारा नदी में रोहू, कतला और नैन प्रजाति के 50 हजार मछलियों के बच्चे छोड़े गए। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान मछलियों के आकार को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठे।

मत्स्य विभाग के अनुसार, नदी में छोड़ी गई मछलियां इंडियन मेजर कार्प (आईएमसी) प्रजाति की हैं, जिन्हें मत्स्य निगम की चौबेरी हैचरी से लाया गया था। इन फिंगरलिंग का आकार 80 से 100 मिलीमीटर बताया गया, जबकि प्रति फिंगरलिंग कीमत 1 रुपये 40 पैसे निर्धारित थी।

कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने मछलियों के छोटे आकार पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि नदी में पहले से मौजूद बड़ी मछलियां इन्हें अपना शिकार बना सकती हैं। इससे मत्स्य संरक्षण अभियान की सफलता प्रभावित होने की संभावना जताई गई।

इस संबंध में सहायक मत्स्य निदेशक शुभम कश्यप ने कहा कि फिंगरलिंग के आकार को लेकर आगे विचार किया जाएगा।

वहीं, निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने मत्स्य संरक्षण की इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी सराहना की।

कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष उस्मान अली, मत्स्य विभाग के अधिकारी और निषाद समाज के लोग मौजूद रहे। विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाना और मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है।

 

रिपोर्ट – अमलेश सोनकर

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