पुतिन को मिली 2000 साल पुरानी तमिल किताब, मोदी के तोहफे से जुड़ा है रूस का पुराना नाता

मोदी पुतिन तिरुक्कुरल गिफ्ट भारत मंडपम BRICS

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मोदी का पुतिन को शानदार तोहफा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात हुई, और इसी दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को एक बेहद खास तोहफा भेंट किया।

पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर की मशहूर पुस्तक तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद गिफ्ट किया। इसे भेंट करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संत तिरुवल्लुवर ने इस किताब में मानव जीवन की अनेक विशेषताओं को बतलाया है, और उन्हें विश्वास है कि यह किताब जन संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।

क्या है तिरुक्कुरल, जो बनी मोदी का पुतिन को शानदार तोहफा

तिरुक्कुरल तमिल साहित्य की सबसे महान और विश्व प्रसिद्ध रचनाओं में से एक मानी जाती है, जिसे ‘तमिल वेद’ भी कहा जाता है। करीब 2000 साल पहले कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर ने इसे लिखा था। इस किताब में 133 अध्यायों के भीतर कुल 1,330 दोहे मौजूद हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन गाइड में से एक माना जाता है।

तमिलनाडु में तिरुक्कुरल को स्कूलों में पढ़ाया जाता है और हर घर में इसे सम्मानित स्थान हासिल है। तमिल लोग तिरुवल्लुवर को एक प्राचीन संत, कवि और दार्शनिक के तौर पर बहुत सम्मान देते हैं, और खुद पीएम मोदी भी अपने कई भाषणों में उनका जिक्र कर चुके हैं।

तिरुक्कुरल का रूस से क्या है पुराना नाता

मोदी का पुतिन को शानदार तोहफा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-रूस के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते की झलक भी है। भारतीय दर्शन और साहित्य में रूस की दिलचस्पी कम से कम 17वीं सदी से देखी जा सकती है। बाद में यूरोपीय भाषाओं में हुए अनुवाद के जरिए तिरुक्कुरल ने रूसी विद्वानों और साहित्यकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

माना जाता है कि रूस के मशहूर लेखक लियो टॉल्स्टॉय ने 19वीं सदी में इसके शुरुआती अनुवाद के जरिए तिरुक्कुरल के बारे में जाना था। कहा जाता है कि इस किताब में सदाचार, करुणा और अहिंसा पर दिए गए जोर ने टॉल्स्टॉय के दार्शनिक लेखन को भी काफी हद तक प्रभावित किया था।

महात्मा गांधी भी रह चुके हैं इस किताब के मुरीद

तिरुक्कुरल की खासियत यह है कि इसकी प्रशंसा सिर्फ भारत या रूस तक सीमित नहीं रही। महात्मा गांधी समेत दुनिया की कई महान हस्तियों ने इस किताब की गहराई और उसमें मौजूद जीवन-दर्शन की सराहना की है। यही वजह है कि तिरुक्कुरल को आज भी भारतीय संस्कृति और वैश्विक साहित्य के बीच एक अहम पुल माना जाता है।

अनुवाद के जरिए दुनिया तक पहुंची तमिल विरासत

तिरुक्कुरल का दुनिया भर की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, और यही वजह है कि यह किताब सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ने का माध्यम बनती जा रही है। रूसी अनुवाद के जरिए अब यह पुस्तक रूस के पाठकों तक भी अपनी बात पहुंचा पा रही है, और मोदी का पुतिन को शानदार तोहफा इसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

पुतिन से मुलाकात का बड़ा कूटनीतिक महत्व

गौरतलब है कि 18वें BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पुतिन नई दिल्ली पहुंचे हैं, और भारत मंडपम में हुई यह मुलाकात समिट की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले हुई। मोदी का पुतिन को शानदार तोहफा देने का यह अंदाज दिखाता है कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को कूटनीतिक मंचों पर भी बखूबी इस्तेमाल कर रहा है, जिससे रिश्तों में एक भावनात्मक जुड़ाव भी बना रहता है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और BRICS समिट से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए हमारा राष्ट्रीय सेक्शन जरूर देखें।

और पढ़ें

[the_ad id="164"]