मोतियाबिंद के ऑपरेशन में मिलेगी अधिक सुरक्षा, कम समय और बेहतर परिणाम की सुविधा

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बिहार में पहली बार संजीवनी आई हॉस्पिटल में लगी अत्याधुनिक वेरिटास फेको मशीन

पटना। बिहार के मरीजों के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली है। पटना के किदवईपुरी स्थित संजीवनी आई हॉस्पिटल में बिहार की पहली वेरिटास फेको मशीन स्थापित की गई है।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस मशीन का भव्य उद्घाटन ग्लूकोमा सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सत्यन पार्थसारथी, विशिष्ट अतिथि डॉ. अखौरी शशि भूषण सहाय, डॉ. सुधीर कुमार और संजीवनी आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर डॉ. सत्यन पार्थसारथी ने कहा कि वेरिटास फेको मशीन मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए अत्याधुनिक तकनीक से युक्त है। इसमें दोहरी पंप प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नलिका प्रणाली और कम तापमान वाली फेको तकनीक जैसी सुविधाएं हैं।

इन तकनीकों की मदद से मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान आंखों को अधिक सुरक्षा मिलती है और ऑपरेशन की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित तरीके से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक सुविधा के उपलब्ध होने से बिहार के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता काफी कम होगी।

डॉ. अखौरी शशि भूषण सहाय ने कहा कि आधुनिक फेको तकनीक से मोतियाबिंद का ऑपरेशन पहले की तुलना में अधिक तेजी और सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को कम समय में दृष्टि में सुधार का अनुभव होने लगता है। उन्होंने कहा कि बिहार में पहली बार इस अत्याधुनिक मशीन की सुविधा उपलब्ध होना राज्य के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है और समय-समय पर नई एवं अत्याधुनिक मशीनें और तकनीक सामने आती हैं। इनका उद्देश्य मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक उपचार उपलब्ध कराना है। वेरिटास फेको मशीन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लाभ बिहार के मरीजों को मिलेगा।

संजीवनी आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि वेरिटास फेको मशीन मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए अत्याधुनिक मशीनों में शामिल है और बिहार में पहली बार इसे संजीवनी आई हॉस्पिटल में स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि देश में भी अभी बहुत कम चिकित्सा संस्थानों में इस तकनीक की सुविधा उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि मोतियाबिंद आंखों में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है और इसका स्थायी उपचार ऑपरेशन ही है। फेको तथा माइक्रो फेको विधि वर्तमान समय में मोतियाबिंद के उपचार की आधुनिक तकनीकों में शामिल हैं। वेरिटास मशीन के माध्यम से ऑपरेशन के दौरान आंख के अंदर के वातावरण और दबाव को अधिक नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इससे विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों को काफी सुविधा मिलती है और ऑपरेशन के परिणाम भी बेहतर प्राप्त होने की उम्मीद रहती है।

डॉ. सुनील कुमार सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक मशीन लगने के बावजूद मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस लागत पर अब तक मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता रहा है,

उसी के अनुरूप इस सुविधा का लाभ मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि संजीवनी आई हॉस्पिटल का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधा को बिहार के मरीजों तक पहुंचाना है, ताकि उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े।

डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से मोतियाबिंद के मरीजों को सुरक्षित और सुविधाजनक उपचार का लाभ मिलेगा। खासकर बुजुर्ग मरीजों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

उद्घाटन समारोह के दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई चिकित्सक एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।मौके पर डॉ. अंशुमन सिंह सहित अन्य चिकित्सक और अस्पताल कर्मी उपस्थित थे।

 

रिपोर्ट रमण कुमार
पटना

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