कुशीनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत आयुष चिकित्सकों के मानदेय में कथित विसंगति को लेकर प्रदेशभर के आयुष चिकित्सकों ने आंदोलन का निर्णय लिया है। आयुष डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (उ.प्र.) के आह्वान पर 21 सितंबर 2026 को लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय एवं उपमुख्यमंत्री/स्वास्थ्य मंत्री के आवास के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को रखने की तैयारी है।
एसोसिएशन की ओर से 15 सितंबर को जिलाधिकारी कुशीनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लगभग 4,000 आयुष चिकित्सक (Mainstream/RBSK) लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पत्र में चिकित्सकों ने वर्ष 2009-10 से निर्धारित दायित्वों के अनुरूप पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाएं देने का उल्लेख किया है। एसोसिएशन के पत्र के अनुसार वर्ष 2009-10 एवं 2010-11 में आयुष एवं MBBS चिकित्सकों का मानदेय 24 हजार रुपये प्रतिमाह समान था।
वर्तमान में MBBS चिकित्सकों का बेसिक मानदेय बढ़कर एक लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया है, जबकि आयुष चिकित्सकों का बेसिक मानदेय 32 हजार रुपये प्रतिमाह बताया गया है। चिकित्सकों ने इसे मानदेय में गंभीर विसंगति बताते हुए समान कार्य के लिए समान मानदेय की मांग उठाई है।
चिकित्सकों का कहना है कि आयुष चिकित्सक भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद लंबे समय से मानदेय संबंधी विसंगति दूर नहीं होने से चिकित्सकों में असंतोष है।
पत्र के माध्यम से सरकार से 20 सितंबर 2026 तक सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया गया था। साथ ही पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि मांगों पर समाधान नहीं होता है तो 21 सितंबर को सुबह 8 बजे लखनऊ में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
*कुशीनगर से बड़ी संख्या में चिकित्सक होंगे शामिल*
इसी क्रम में कुशीनगर जनपद में संविदा पर कार्यरत आयुष चिकित्सक भी बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचकर आंदोलन में अपनी सहभागिता दर्ज कराने की तैयारी में हैं। चिकित्सकों के बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय से बाहर रहने के कारण जनपद में आयुष चिकित्सा सेवाओं पर अस्थायी प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों एवं आम मरीजों को चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
आयुष चिकित्सकों का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मानदेय संबंधी मांग को सरकार के समक्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से रखना है। चिकित्सकों ने सरकार से मामले में शीघ्र निर्णय लेकर समान कार्य के लिए समान मानदेय की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। आम जनता के हित को देखते हुए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मानदेय संबंधी इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है और 21 सितंबर के प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से पहले कोई समाधान निकलता है या नहीं।
साजिद अंसारी पड़रौना









