एक दिन पहले रिसाव को लेकर अजय लल्लू ने उठाए थे सवाल, रात में डीएम-एसपी पहुंचे मौके पर; राहत-बचाव कार्य तेज
कुशीनगर। नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज दबाव के बीच तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में अहिरौली दान-पिपरासी (एपी) तटबंध सोमवार देर रात गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। रात करीब 10:30 बजे तटबंध टूटने की सूचना के बाद पानी तेजी से आसपास के इलाकों की ओर फैलने लगा। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ततवा टोला के सामने तटबंध का करीब 20 फुट हिस्सा टूटने से छह से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और बड़ी आबादी के सामने बाढ़ का खतरा पैदा हो गया। तटबंध में रिसाव सामने आने के बाद प्रशासन ने पहले से ही बचाव कार्य शुरू कर दिया था। इसी क्रम में सोमवार को जिलाधिकारी संजय चौहान और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों और तटबंध का निरीक्षण किया। उनके साथ स्थानीय विधायक डॉ. असीम कुमार राय भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को तटबंध की सुरक्षा तथा राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
एक दिन पहले ही उठे थे सवाल
तटबंध टूटने से एक दिन पहले ही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एपी तटबंध में हुए रिसाव को लेकर मौके पर पहुंचकर विभागीय तैयारियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तटबंध की स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए बचाव कार्यों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया था। तटबंध टूटने के बाद देर रात मौके पर पहुंचे अजय कुमार लल्लू ने अधिकारियों और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तटबंध की स्थिति पहले से खराब थी और समय रहते प्रभावी इंतजाम किए जाने चाहिए थे। लल्लू ने आरोप लगाया कि मौके पर न तो पर्याप्त बोल्डर उपलब्ध हैं और न ही जियो बैग की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि करीब 60 मीटर तक बांध के कटने की स्थिति बनी हुई है और ऐसे में आसपास के ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहां सोई है सरकार, लोगों के साथ यह कैसा मजाक है। हालांकि ये आरोप कांग्रेस नेता के हैं और प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अलग से प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।

रात के अंधेरे में घर छोड़ने को मजबूर ग्रामीण
तटबंध टूटने के बाद आसपास के गांवों में पानी तेजी से फैलने लगा। अचानक आई इस स्थिति से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। रात के अंधेरे में लोग अपने घरों से जरूरी सामान, अनाज, कपड़े और अन्य घरेलू सामान निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर लादते नजर आए। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते हुए साफ देखा गया। कई परिवार अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से गांव से बाहर निकलते रहे। अंधेरे में पानी के बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीणों के चेहरे पर दहशत साफ दिखाई दे रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध में पहले से रिसाव हो रहा था और यदि समय रहते प्रभावी ढंग से मरम्मत कर दी जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। तटबंध टूटने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता गांवों में तेजी से पहुंच रहे बाढ़ के पानी और लोगों की सुरक्षित निकासी को लेकर है। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
रात लगभग 12:30 बजे मौके पर पहुंचे डीएम-एसपी
तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी संजय चौहान और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार देर रात करीब 12:30 बजे मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अंधेरे में ही मौके की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से तटबंध की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य तेज करने, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। मौके पर प्रशासन और पुलिस के जवानों की मौजूदगी में जेसीबी समेत अन्य संसाधनों से तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से को रोकने का प्रयास किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक अंधेरे में भी पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा था, जिससे बचाव कार्य में मुश्किलें आईं। नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच पहले से ही जिले के निचले इलाकों में बाढ़ का दबाव बना हुआ था। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमों को सक्रिय किया है। मुख्यमंत्री स्तर से भी स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को राहत-बचाव कार्य तेज करने तथा ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता तटबंध के कटाव को नियंत्रित करने, पानी के बहाव को रोकने और प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की है। स्थिति पर प्रशासन और पुलिस की लगातार नजर बनी हुई है।









