मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां दशहरे पर रावण दहन के लिए मुस्लिम कारीगरों का परिवार कई पीढ़ियों से पुतले बनाने का कार्य कर रहा है। इस बार विजयदशमी पर 71 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
मथुरा के रामलीला मैदान में कारीगर रहीश अहमद उर्फ छोटे खान अपने परिवार के साथ रावण, मेघनाद और अहिरावण के पुतले तैयार कर रहे हैं। रहीश अहमद बताते हैं कि उनका परिवार चौथी-पांचवीं पीढ़ी से यह परंपरा निभाता आ रहा है। उनके लिए यह केवल रोजगार नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की सेवा करने का सौभाग्य है।

रहीश अहमद ने बताया कि महीनों की मेहनत और लगन से पुतले तैयार किए जाते हैं। इन्हें बनाते समय खुशी होती है, लेकिन जब अपने ही हाथों से इन्हें जलाना पड़ता है तो थोड़ा दुख भी होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम तो प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाते हैं, लेकिन पुतलों में आग लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।
उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई के कारण पुतले बनाने की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद रामलीला सभा की सेवा उनके लिए सर्वोपरि है।
रहीश अहमद का परिवार धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर वर्षों पुरानी परंपरा निभा रहा है। उनकी यह पहल मथुरा की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का संदेश दे रही है।









