पानी ने मचाई लखनऊ में हाहाकार, फैजुल्लागंज में बाढ़ से जनजीवन बेहाल

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लोकेशन: लखनऊ
रिपोर्टर: दीपक सिंह गौर
संपर्क: 9889758673

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। गोमती नगर से लेकर फैजुल्लागंज तक कई इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर फैजुल्लागंज की कई कॉलोनियों में बाढ़ का पानी लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। कहीं सड़कें जलमग्न हैं, तो कहीं लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे हैं।

करीब 40 हजार मकानों और तीन लाख की आबादी वाले इस इलाके में लोगों के सामने भोजन, पानी, सुरक्षित आवागमन और रहने की जगह जैसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रभावित परिवारों की परेशानियां अब भी कम होती नजर नहीं आ रही हैं। आखिर बाढ़ के बीच कैसे गुजर रही है लोगों की जिंदगी और क्या है राहत-बचाव की जमीनी हकीकत? देखिए ये रिपोर्ट।

 फैजुल्लागंज में बाढ़ का कहर

 बाढ़ का पानी, डूबे रास्ते, नाव और घरों में घुसा पानी]

ये तस्वीरें राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज की हैं, जहां कभी सड़कों और गलियों में लोगों की चहल-पहल दिखाई देती थी, आज उन्हीं रास्तों पर बाढ़ का पानी लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इलाके की कई कॉलोनियां जलभराव की चपेट में आ गई हैं।

मथुरा बिहार कॉलोनी, कृष्ण कॉलोनी, पुराना दाऊद नगर और मामा कॉलोनी समेत आसपास के इलाकों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अब अपने घरों की सुरक्षा से ज्यादा अपनी और अपने परिवार की जिंदगी की चिंता सता रही है।

 घर छोड़ने को मजबूर परिवार

– घरों में भरा पानी, सामान समेटते लोग, घर छोड़कर जाते परिवार]

किसी ने किराए के कमरे में शरण लेने की तैयारी कर ली है, तो कोई अपने पुश्तैनी मकान की तरफ जाने को मजबूर है। सालों की मेहनत से बनाया गया घर, घर के अंदर रखा जरूरी सामान और जिंदगीभर की जमा-पूंजी—सब कुछ पानी के बीच फंसा हुआ है।

बाढ़ का पानी लोगों के आशियानों में दाखिल हो चुका है, लेकिन लोग चाहकर भी अपना सामान सुरक्षित जगह पर नहीं ले जा पा रहे हैं। परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस मुश्किल घड़ी में वे अपने घर और परिवार को कैसे सुरक्षित रखें।

 स्थानीय निवासी सुरेंद्र]

 तीन लाख की आबादी पर बाढ़ का संकट

– जलमग्न कॉलोनियां, पानी से घिरे मकान और गलियां]

स्थानीय लोगों के मुताबिक, फैजुल्लागंज में करीब 40 हजार मकान और लगभग तीन लाख की आबादी निवास करती है। ऐसे में बाढ़ का बढ़ता पानी हजारों परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

लोगों को डर है कि अगर पानी का स्तर और बढ़ा, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। घर, परिवार और जरूरी सामान की सुरक्षा अब लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

 राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयास

 बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा, राशन और राहत सामग्री का वितरण]

वहीं, स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक राशन और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से भी राहत एवं बचाव कार्य किए जाने की बात कही जा रही है।

लेकिन प्रभावित इलाकों से सामने आ रही तस्वीरें कई सवाल खड़े करती हैं। कहीं लोग राहत सामग्री मिलने का इंतजार कर रहे हैं, तो कहीं खाने-पीने की जरूरतों को पूरा करना परिवारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

सवाल यह है कि बाढ़ से घिरे हर जरूरतमंद परिवार तक राहत कब और कैसे पहुंचेगी?

 आवागमन बना सबसे बड़ी मुसीबत

– पानी में नाव, नाव का इंतजार करते लोग, जलमग्न रास्ते]

बाढ़ के बीच सबसे बड़ी समस्या आवागमन की है। रास्तों पर पानी भरने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। जरूरी सामान लेने जाना हो या किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना, हर काम के लिए लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में नाव और सुरक्षित आवागमन के साधनों की जरूरत और भी बढ़ जाती है। पानी से घिरे परिवारों के लिए जरूरी है कि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

 बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान

 पानी से घिरे घर, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं]

इस आपदा का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है। परिवारों के सामने दोहरी चुनौती है। घर में रहें तो पानी बढ़ने का डर और घर छोड़कर जाएं तो सामान की सुरक्षा की चिंता।

सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा, बुजुर्गों की देखभाल और परिवार के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था का है। ऐसे हालात में सुरक्षित आश्रय और समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी है।

 बाढ़ प्रभावित महिला/बुजुर्ग]

 प्रशासन के सामने राहत पहुंचाने की चुनौती

 राहत सामग्री लेते लोग और मदद का इंतजार करते प्रभावित परिवार]

तस्वीर का एक पहलू यह है कि राहत और बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कुछ प्रभावित परिवार मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय, नावों और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।

फैजुल्लागंज में बाढ़ अब महज जलभराव की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह हजारों परिवारों के सामने सुरक्षित रहने, भोजन-पानी जुटाने और अपने घरों को बचाने की बड़ी चुनौती बन गई है।

लखनऊ के फैजुल्लागंज में बाढ़ ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लोगों को इंतजार है कि पानी कब उतरेगा, वे कब अपने घरों में सुरक्षित लौट सकेंगे और तब तक उन्हें राहत एवं बचाव की सुविधाएं कितनी मिल पाएंगी।

अब जरूरत है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करे और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भोजन, सुरक्षित आश्रय और जरूरी सहायता से वंचित न रहे।

 रिपोटर दीपक सिंह गौर  लखनऊ

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