डिजिटल युग में युवाओं की पहली पसंद बन रही है राजभाषा,रामसुखी याद

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स्थानीय दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार में हिंदी दिवस के अवसर पर प्रातः कालीन प्रार्थना सभा में छात्र /छात्राओं को संबोधित करते हुए हिन्दी शिक्षक रामसुखी यादव ने कहा कि हिन्दी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 ई. में संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।

इसी ऐतिहासिक दिन की याद में प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस मनाया जाता है। हिंदी की ताकत केवल उसके बोलने वालों की संख्या में नहीं है, बल्कि इसकी असली ताकत इसकी अभिव्यक्ति की क्षमता में है। हम हिंदी में प्रेम भी व्यक्त कर सकते हैं, अपनी पीड़ा भी बता सकते हैं,सवाल भी पूछ सकते हैं और अपने विचारों को मजबूती से सामने भी रख सकते हैं।

हिंदी का साहित्य इसकी समृद्धि का बड़ा प्रमाण है। कबीर, तुलसीदास, सूरदास, प्रेमचंद, महादेव वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर और हरिवंश राय बच्चन जैसे रचनाकारों ने हिन्दी को अपनी रचनाओं से समृद्ध किया । उनकी रचनाओं में समाज, संघर्ष,प्रेम, संवेदना और जीवन के अनेक रंग दिखाई देते हैं।

छात्र/ छात्राओं को संबोधित करते हुए हिंदी प्रवक्ता लेफ्टिनेंट शेषनाथ ने कहा कि राष्ट्रभाषा हिंदी राष्ट्र की आत्मा है। यह भारत की आत्मा की धुरी है ।भारत की संस्कृति और सभ्यता की मूल चेतना को सूक्ष्मता से यही अभिव्यक्त करती है। राष्ट्रीय विचारों की यह कोश है। यह भारतीय आत्मा की प्रतीक है। स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण के समय हिन्दी को राष्ट्र भाषा घोषित किया गया। इसके लिए अनेक देशभक्तों ने संघर्ष भी किया।

इस अवसर पर विद्यालय की होनहार छात्रा महिमा पांडेय द्वारा शानदार भाषण की प्रस्तुति की गई।

कार्यक्रम का संचालन बिनोद कुमार विमल एवं संयोजन विनोद कुमार यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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