सिंघु बॉर्डर पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, BRICS समिट से पहले पुलिस का बड़ा भंडाफोड़

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खालिस्तान ग्रैफिटी मामले में बड़ा भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को पता चला है कि चल रहे BRICS 2026 लीडर्स समिट से ठीक पहले सिंघु बॉर्डर इलाके में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे गए थे, और इसी मामले में यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

किसने और क्यों लिखे थे भड़काऊ नारे

पुलिस को शक है कि यह पूरा काम अमेरिका में बैठे अलगाववादी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) के इशारे पर किया गया। इस संगठन का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जिसे भारत सरकार जुलाई 2020 में ही व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर चुकी है। खालिस्तान ग्रैफिटी मामले की जांच में सामने आया कि 7 सितंबर को दिल्ली के बाहरी इलाके अलीपुर में गुरु तेग बहादुर मेमोरियल के पास यह ग्रैफिटी बनाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, इसमें कई भड़काऊ नारे लिखे गए थे, जिनमें ‘मोदी के BRICS को खत्म करो’, ‘खालिस्तान SFJ’, ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘SFJ खालिस्तान अमेरिका फर्स्ट’ शामिल हैं।

कौन हैं गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी

गिरफ्तार लोगों में 31 साल का प्रीतपाल भी शामिल है, जो भारत में SFJ का ऑपरेशनल हेड बताया जा रहा है। पुलिस ने प्रीतपाल के अलावा हरमिंदर सिंह और निरंजन को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सिंघु बॉर्डर इलाके की CCTV फुटेज की मदद से इन तीनों की गतिविधियों का पता लगाया।

प्रीतपाल का 2023 वाला पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया

खालिस्तान ग्रैफिटी मामले में गिरफ्तार प्रीतपाल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2023 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे और राजविंदर सिंह को पंजाबी बाग और नांगलोई में इसी तरह की ग्रैफिटी बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पटियाला जेल में बंद प्रीतपाल को इस साल की शुरुआत में जमानत पर रिहा किया गया था।

पन्नू ने दिए थे 7000 डॉलर देने के वादे

पुलिस सूत्र के मुताबिक, प्रीतपाल Signal ऐप के जरिए सीधे पन्नू के संपर्क में था, और पन्नू ने इस काम के बदले आरोपियों को कुल 7,000 अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि प्रीतपाल शक से बचने के लिए अपनी मां के बैंक खाते में हवाला के जरिए विदेश से लाखों रुपये मंगाता था।

डबल एजेंट बनकर पुलिस को देता रहा गुमराह

पुलिस के मुताबिक, जमानत पर बाहर आने के बाद भी प्रीतपाल SFJ का कामकाज संभालता रहा। पकड़े जाने से बचने के लिए वह डबल एजेंट के तौर पर काम करता था। खालिस्तान ग्रैफिटी मामले की जांच में यह भी सामने आया कि पटियाला जेल में रहते हुए ही प्रीतपाल ने हरमिंदर सिंह और निरंजन को पैसों के बदले भर्ती किया था।

SFJ पर पहले से लगा है प्रतिबंध

गृह मंत्रालय ने पहली बार 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगाया था। 8 जुलाई 2024 की अधिसूचना के जरिए इस प्रतिबंध को अगले पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

खालिस्तान ग्रैफिटी मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से ठीक पहले सुरक्षा तंत्र को और कितना मजबूत करने की जरूरत है। BRICS जैसे हाई-प्रोफाइल समिट के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की गतिविधि हो जाना गंभीर चिंता का विषय है।

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि SFJ जैसे प्रतिबंधित संगठन डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत में बैठे युवाओं को टारगेट करके उन्हें आसानी से अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर पैसों का लालच देकर छोटी-छोटी गतिविधियों से शुरुआत कराई जाती है, और धीरे-धीरे बड़े कामों में इस्तेमाल किया जाता है। खालिस्तान ग्रैफिटी मामले में भी यही पैटर्न सामने आया है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

फिलहाल दिल्ली पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि इसमें और कौन-कौन शामिल है। खालिस्तान ग्रैफिटी मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।

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