आनंद कुमार के बेटों की राजनीति खत्म! मायावती का बड़ा ऐलान, भतीजी को मिलेगा मौका

मायावती का बड़ा ऐलान आनंद कुमार बेटे BSP

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मायावती का बड़ा ऐलान बसपा में इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के साफ संकेत दे दिए हैं और संगठन में युवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। इसी के साथ मायावती ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों को बसपा में कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

X पर पोस्ट कर मायावती ने दिए बड़े संकेत

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि पार्टी में युवाओं को करीब 50% तक संगठनात्मक भागीदारी देने की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में समाज के युवा चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

मायावती का बड़ा ऐलान, आनंद कुमार के बेटों पर लिया सख्त फैसला

मायावती ने साफ किया कि संगठन में महिला और पुरुष दोनों युवा चेहरों को समान अवसर मिलना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने परिवारवाद को लेकर एक बड़ा और सख्त ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा कि वे अपने भाई-बहनों और परिवार के युवाओं को सांसद, विधायक, मंत्री या किसी अन्य राजनीतिक पद से हमेशा दूर रखती आई हैं।

मायावती के मुताबिक, अविवाहित होने और सुरक्षा की जरूरत के चलते उन्होंने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखा। लेकिन मायावती ने अब यह साफ कर दिया है कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे-बड़े किसी भी राजनीतिक पद पर काम करने का मौका नहीं दिया जाएगा।

भतीजी दीपिका आनंद को मिल सकती है जिम्मेदारी

मायावती के मुताबिक, अगर भविष्य में आनंद कुमार को मदद की जरूरत पड़ती है, तो उनकी बेटी कुमारी दीपिका आनंद उनकी मदद कर सकती हैं। फिलहाल दीपिका आनंद वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। हालांकि अगर दीपिका इसके लिए तैयार नहीं होतीं, तो पार्टी की सहमति से दलित समाज के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।

कांशीराम की राह पर मायावती का परिवारवाद विरोधी रुख

मायावती ने कहा कि वे कांशीराम की तरह ही परिवारवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ी हैं, और बसपा को परिवारवाद मुक्त बनाए रखना बेहद जरूरी है। मायावती का बड़ा ऐलान इसी सोच का सीधा नतीजा माना जा रहा है।

मायावती ने गिनाई अपनी सरकार की उपलब्धियां

इसके साथ ही मायावती ने बसपा की चार बार की सरकार का भी जिक्र किया। उनके कार्यकाल में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण-शहरी विकास पर बड़े स्तर पर काम हुआ। मायावती का दावा है कि उनकी सरकार की नीतियों के चलते प्रदेश से पलायन काफी हद तक थम गया था। उन्होंने 2012 में सरकार न बनने का ठीकरा विरोधी दलों के जातिवादी रवैये पर फोड़ा।

निष्कासित नेताओं की वापसी की खबरों को बताया फेक न्यूज

मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा को उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने से रोकने के लिए साम-दाम-दंड-भेद जैसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर बसपा से निष्कासित नेताओं की वापसी को लेकर चल रही खबरों को मायावती ने पूरी तरह फेक न्यूज करार दिया।

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