दशहरे पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना, समाजवाद और रामराज्य को लेकर कही बड़ी बात

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले दशहरे पर अखिलेश यादव के बयान ने सियासी चर्चा तेज कर दी है| उन्होंने रामराज्य, समाजवाद और AI पर सवाल उठाए|

बुराई के खिलाफ लड़ाई का किया आह्वान

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में दशहरे के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं| इस दौरान उन्होंने त्योहार को बुराई के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की सीख से जोड़ा| अखिलेश ने लोगों से अपील की कि समाज में बुराइयों को दूर करने की पहल उत्तर प्रदेश से की जाए| उनके इस संदेश को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में तेज हो रही राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है| हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में किसी एक राजनीतिक दल का नाम लेकर इस अपील को स्पष्ट रूप से चुनावी अभियान से नहीं जोड़ा|

रामराज्य और समाजवाद को लेकर कही बात

अखिलेश यादव ने भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए रामराज्य की अवधारणा पर अपनी बात रखी| उन्होंने समाजवाद और रामराज्य के बीच संबंध बताते हुए कहा कि दोनों में विश्वास रखने वाले लोग सच्चे सनातनी हैं| उनके मुताबिक, सच्ची सनातनी सोच का आधार समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना है| उन्होंने इसके विपरीत आचरण करने वालों को ‘फर्जी’ सनातनी बताया| उनके इस बयान को धर्म, सामाजिक विचारधारा और राजनीतिक पहचान को लेकर बीजेपी तथा सपा के बीच चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है|

AI वीडियो और पोस्टर विवाद का भी किया जिक्र

सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में AI से तैयार उस वीडियो का मुद्दा उठाया, जिसमें उन्हें रावण के रूप में दिखाए जाने की बात सामने आई थी| उन्होंने आरोप लगाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग समाज की भलाई के बजाय नकारात्मक प्रचार के लिए किया जा रहा है| दशहरे से पहले लखनऊ में ऐसे पोस्टर भी चर्चा में आए थे, जिनमें अखिलेश यादव और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को रावण के विभिन्न चेहरों के रूप में दर्शाया गया था| इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था| पोस्टर लगाने वाले संगठन ने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाए थे, जबकि विपक्ष ने इसे आपत्तिजनक प्रचार बताया था| हालांकि, संबंधित पोस्टर या वीडियो के निर्माण में बीजेपी की भूमिका होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है| चुनाव से पहले AI आधारित प्रचार को लेकर यह विवाद राजनीतिक दलों के बीच डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े करता है|

और पढ़ें

[the_ad id="164"]