कुशीनगर: राम-रावण युद्ध के सजीव मंचन ने मोहा लोगों का मन, पांच दशक पुरानी परंपरा आज भी कायम

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कुशीनगर। हेतिमपुर बाजार में विजयदशमी के अवसर पर बुधवार को हर्षोल्लास के साथ रावण दहन और दशहरा मेले का आयोजन किया गया। राम-रावण युद्ध और रावण दहन का सजीव मंचन देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। छोटी गंडक नदी के तट पर आयोजित मेले में पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

कुशीनगर और देवरिया जिले की सीमा पर स्थित हेतिमपुर बाजार में दशकों से रामलीला और रावण दहन की परंपरा चली आ रही है। करीब पांच दशक से स्थानीय लोगों के सहयोग से इस आयोजन को भव्य रूप दिया जा रहा है। नवरात्र के पहले दिन से लेकर विजयदशमी तक स्थानीय कलाकार रामलीला का मंचन करते हैं। वहीं, दशहरे के दिन विशाल मेले के साथ राम-रावण युद्ध और रावण दहन का आकर्षक आयोजन किया जाता है।

इस वर्ष भी मेले को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने मेले का आनंद लिया और कलाकारों के अभिनय की सराहना की। रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।

हेतिमपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार यादव ने मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विजयदशमी केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने की भी सीख देता है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष रावण का दहन किया जाता है, लेकिन जब तक व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार, द्वेष और बुराइयों का अंत नहीं करेगा, तब तक समाज में प्रेम, भाईचारा, समरसता और न्याय स्थापित करना कठिन है। उन्होंने लोगों से विजयदशमी के संदेश को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

इस तरह हेतिमपुर में पांच दशक पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए दशहरा मेला और रावण दहन का आयोजन उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

रिपोर्टर: ज्ञानेश्वर बरनवाल
स्थान: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

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