उप कृषि निदेशक ने किसानों से धान की पराली न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। शासन के निर्देशों के अनुपालन में पराली जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने किसानों से दूसरों को भी जागरूक करने का आग्रह किया।
एआर कोऑपरेटिव सुनील गुप्ता ने उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अधिक खाद डालना ज्यादा उत्पादन की गारंटी नहीं है।
किसान अजय चौरसिया ने यूरिया-डीएपी के साथ नैनो उर्वरकों की टैगिंग और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री की शिकायत की। रमेश चन्द्र पटेल ने उर्वरकों की उपलब्धता, जबकि संतराज यादव ने खाद, बीज एवं अन्य कृषि निवेश समय से उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
अधिकारियों ने बताया कि रबी सीजन के लिए गेहूं, दलहन और तिलहन के बीज तथा मिनीकिट सभी विकास खंडों में उपलब्ध हैं। किसानों से संबंधित विभागों से संपर्क कर बीज प्राप्त करने की अपील की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे।








