तिहाड़ जेल में सुरक्षा को चकमा देकर कैसे पहुंचते हैं मोबाइल और हथियार? इन घटनाओं से समझिए पूरी कहानी

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देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शामिल तिहाड़ में कैदियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नशीले पदार्थ और धारदार हथियार मिलने के मामले सामने आते रहे हैं| जेल में जैमर और कड़ी निगरानी के बावजूद प्रतिबंधित सामान की बरामदगी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है| कभी जेल की दीवार के पार से सामान फेंका गया, तो कभी कैदियों ने मोबाइल छिपाने के लिए शरीर का इस्तेमाल किया| कुछ मामलों में जेलकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई| चार वास्तविक घटनाओं से समझिए कि तिहाड़ में प्रतिबंधित सामान पहुंचने के मामले कैसे सामने आए|

दीवार के पार से फेंका गया पैकेट, मिले 23 सर्जिकल ब्लेड और मोबाइल

10 मार्च 2023 को सामने आई घटना में तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 में एक कैदी के पास से 23 सर्जिकल ब्लेड, नशीले पदार्थ, दो स्मार्टफोन और एक सिम कार्ड बरामद किए गए थे| जेल अधिकारियों के मुताबिक, 9 मार्च की सुबह करीब 6:40 बजे कुछ कैदियों की संदिग्ध गतिविधियां देखकर तलाशी ली गई थी| जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित सामान एक पैकेट में रखकर पास की जेल की दीवार के ऊपर से फेंका गया था| पैकेट फेंकने वाले कैदी की पहचान भी की गई| मामले की आगे की जांच के लिए पुलिस को सूचना दी गई थी| यह घटना दिखाती है कि जेल के भीतर बंद कैदियों तक सामान पहुंचाने के लिए बाहरी संपर्क या जेल परिसर के दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका कितनी गंभीर है|

चार मोबाइल निगल गया कैदी, अस्पताल में निकालने पड़े फोन

24 अगस्त 2019 को सामने आई एक घटना में 25 वर्षीय कैदी अनुज ने जांच से बचने के लिए छोटे मोबाइल फोन निगल लिए थे| रिपोर्ट के मुताबिक, वह पैरोल पर बाहर रहने के दौरान ये फोन लेकर आया था| उसने फोन पर टेप लपेटकर उन्हें निगल लिया था| कैदी ने तीन फोन उल्टी के जरिए बाहर निकाल दिए, लेकिन चौथे फोन की वजह से उसके पेट में तेज दर्द होने लगा| अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान उसके शरीर में फोन होने का पता चला| इसके बाद डॉक्टरों को सर्जरी करके फोन निकालना पड़ा| इसी अवधि में जेल प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक महीने में करीब 330 मोबाइल फोन बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी| अधिकारियों के मुताबिक, कुछ फोन जेल की दीवारों के पास मिले थे, जबकि अन्य कैदियों की कोठरियों और शरीर में छिपाए गए थे| यह मामला दिखाता है कि छोटे आकार के मोबाइल सुरक्षा जांच से बचने के लिए किस तरह छिपाए जा सकते हैं|

जेलकर्मी के संपर्क में था कैदी, दूसरे फोन की भी जांच

अगस्त 2025 में तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 में एक हाई-रिस्क कैदी के पास से मोबाइल मिलने के बाद तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के एक कांस्टेबल की भूमिका जांच के दायरे में आई| जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कैदी के पास मिले फोन के कॉल रिकॉर्ड में कांस्टेबल से बार-बार संपर्क के संकेत मिले| इसके बाद कांस्टेबल के बैरक की तलाशी ली गई, जहां एक और मोबाइल फोन मिला| आशंका जताई गई कि यह फोन किसी दूसरे कैदी को दिया जाना था| दोनों फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए और विभागीय जांच शुरू हुई| हालांकि, उस समय तक कांस्टेबल की भूमिका और फोन पहुंचाने के आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई थी| इसलिए इस घटना को कथित तस्करी के मामले के रूप में ही देखा जाना चाहिए|

2025 में 300 से ज्यादा फोन बरामद, जेल नंबर 13 पर विशेष निगरानी

नवंबर 2025 में सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में जनवरी से अक्टूबर के बीच कैदियों से 300 से ज्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए थे| अधिकारियों के अनुसार, इनमें से ज्यादातर फोन तिहाड़ की जेल नंबर 13 से मिले, जहां नंदू, छेनू और बिश्नोई गिरोहों से जुड़े हाई-रिस्क कैदी बंद थे| जेल अधिकारियों के मुताबिक, कुछ कैदियों के पास से छोटे आकार के कीपैड फोन मिले, जिन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है| तलाशी के दौरान असली फोन की जगह साबुन से बनाए गए नकली फोन देकर अधिकारियों को भ्रमित करने के मामले भी सामने आए थे| इसी चुनौती से निपटने के लिए जेल में इंटेलिजेंस सेल बनाया गया, जो प्रतिबंधित सामान की आपूर्ति से जुड़ी सूचनाएं जुटाता है| अधिकारियों के अनुसार, इस सेल से मिलने वाले इनपुट की पुष्टि के बाद छापेमारी की जाती है| इसके बावजूद मोबाइल और हथियारों की बरामदगी यह सवाल उठाती है कि जेल की निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत क्यों बनी हुई है|

सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती

इन घटनाओं से पता चलता है कि तिहाड़ में प्रतिबंधित सामान मिलने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां रही हैं| कहीं दीवार के पार से पैकेट फेंका गया, कहीं कैदी ने मोबाइल शरीर में छिपाया और कहीं जेलकर्मी की कथित भूमिका की जांच हुई| हालांकि, हर घटना में सामान पहुंचने का तरीका एक जैसा नहीं था|जेल प्रशासन के सामने चुनौती केवल मोबाइल फोन पकड़ने की नहीं, बल्कि बाहरी संपर्कों, प्रतिबंधित वस्तुओं की आपूर्ति और संभावित मिलीभगत पर रोक लगाने की भी है| नियमित तलाशी, खुफिया निगरानी और जांच के आधार पर कार्रवाई ही ऐसी घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है|

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