समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी अश्वनी शुक्ला, मंच के संरक्षक सुनील कुमार यादव और किन्नर समाज की सलमा चौधरी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजकों ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

समाजसेवी अश्वनी शुक्ला ने कहा कि गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का प्रतीक है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। गरबा के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना के साथ समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने बताया कि गरबा शब्द संस्कृत के ‘गर्भ‘ से जुड़ा है। पारंपरिक रूप से मिट्टी के पात्र में दीपक जलाकर उसके चारों ओर नृत्य किया जाता है, जिसे गर्भदीप कहा जाता है। यह जीवन और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।
कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल यादव, गुड्डू गुप्ता, कुंदन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-अशोक कुमार जायसवाल









