कुशीनगर में सात निजी अस्पतालों पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना

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पडरौना। जनपद में निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान सात निजी अस्पतालों में 24 घंटे पंजीकृत चिकित्सक की उपलब्धता नहीं मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. चंद्रप्रकाश ने संबंधित अस्पताल संचालकों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में जुर्माना जमा नहीं करने वाले अस्पतालों के लाइसेंस के खिलाफ निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी अस्पतालों की जांच का अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के प्रथम चरण में जिले के 52 निजी अस्पतालों की जांच की गई थी। जांच के दौरान अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता पंजीकरण, उपचार व्यवस्था और निर्धारित मानकों का जायजा लिया गया। जांच रिपोर्ट तथा अस्पताल संचालकों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के मिलान के बाद सात अस्पतालों में अनियमितता सामने आई।

विभाग के अनुसार इन अस्पतालों में 24 घंटे पंजीकृत चिकित्सक की उपलब्धता नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है।

इन सात अस्पतालों पर हुई कार्रवाई

जिन अस्पतालों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, उनमें आयुष्मान हॉस्पिटल कसया, शांति लाइफ केयर हॉस्पिटल कसया, नवजीवन ज्योति खिरकिया पडरौना, सोनमती हॉस्पिटल कसया, दीन दयाल हॉस्पिटल कसया, सरवरी बेगम हॉस्पिटल कसया और फातिमा हॉस्पिटल सपहा रोड शामिल हैं। सीएमओ ने संबंधित अस्पताल संचालकों को निर्धारित समय के भीतर जुर्माना जमा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर जुर्माना जमा नहीं किया गया तो संबंधित अस्पताल के लाइसेंस के विरुद्ध निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

18 अस्पतालों को मिली क्लीन चिट

जांच अभियान के दौरान कई अस्पतालों में व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 18 अस्पतालों में मानक के अनुरूप व्यवस्थाएं मिलने पर उन्हें क्लीन चिट दी गई है, जबकि अनियमितताएं मिलने पर दो अस्पतालों को सील किया जा चुका है।

सीएमओ डॉ चंद्रप्रकाश ने कहा कि निजी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। मानकों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

एक दिन पहले भी दो अस्पतालों पर हुई थी कारवाई

कप्तानगंज स्थित सच्चिदानंद हॉस्पिटल में 24 अगस्त को चार दिन की नवजात बच्ची की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध जताया था और मामले की जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच टीम गठित की गई थी। जांच टीम ने अस्पताल के उपचार संबंधी अभिलेखों और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि नवजात के इलाज के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया। विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट में भी उपचार में लापरवाही की बात सामने आने के बाद जिला पंजीकरण प्राधिकरण ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की।

सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश के अनुसार सच्चिदानंद हॉस्पिटल की एनआईसीयू सेवा स्थगित कर दी गई है। मामले में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। संबंधित चिकित्सक के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

फरहान हॉस्पिटल पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड

दूसरा मामला तमकुहीराज क्षेत्र के फरहान हॉस्पिटल से जुड़ा है। यहां 43 वर्षीय आतिया परवीन की पिता की थैली का ऑपरेशन एक अप्रैल को चिकित्सक डॉ. मुकेश यादव ने किया था। ऑपरेशन के करीब दो महीने बाद महिला की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। बाद में हालत खराब होने पर उन्हें लखनऊ स्थित केजीएमयू ले जाया गया, जहां छह जून को उनकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद उनके पति ने स्वास्थ्य विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए अस्पताल और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच कराई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में सर्जन डॉ. मुकेश यादव की लापरवाही की पुष्टि होने के बाद जिला पंजीकरण प्राधिकरण ने फरहान हॉस्पिटल के संचालक पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। साथ ही चिकित्सक के खिलाफ मेडिकल काउंसिल स्तर से जांच और नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

24 घंटे पंजीकृत चिकित्सक की उपलब्धता नहीं मिलने पर सीएमओ की कार्रवाई, सप्ताह भर में जुर्माना जमा न करने पर लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी

साजिद अंसारी पड़रौना

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