ग्रामीणों के मुताबिक कचरे से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हवा का रुख गांव की तरफ होने पर बदबू और अधिक फैल जाती है। ग्रामीणों ने इससे बीमारियां फैलने की आशंका भी जताई है।
ग्रामीणों का दावा है कि करीब दस वर्षों से शहर का कचरा यहां डंप किया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्लांट पशुचर की जमीन पर स्थित है और जिस उद्देश्य से इसे स्थापित किया गया था, उसके अनुसार ऑर्गेनिक खाद बनाने की प्रक्रिया मौके पर दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व जिलाधिकारी अंजनेय सिंह के कार्यकाल में कार्रवाई कर प्लांट में ताला लगाया गया था, लेकिन अब दोबारा यहां कचरा पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की है और समस्या के समाधान की मांग की है।
अब सवाल है कि जब कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा तो लगातार कचरा यहां क्यों पहुंचाया जा रहा है? ग्रामीणों को दुर्गंध और संभावित स्वास्थ्य जोखिम से कब राहत मिलेगी? मामले में नगर पालिका और प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट – शिवम् अवस्थी









